आज का बनिया समाज: कारोबार से दूरी और नौकरी की दौड़, कहां जा रहे हैं हम!
कभी बनिया समाज को व्यापार की रीढ़ कहा जाता था। देश के हर कस्बे, हर गली-मोहल्ले में अगर कोई दुकान दिखती थी तो मालिक बनिया ही होता था। किराना हो, कपड़ा हो, गहना हो या अनाज “बनिया” नाम अपने आप में भरोसे का प्रतीक था। लेकिन आज तस्वीर बदल रही है- बनिया के बेटे दुकान छोड़कर नौकरी की