क्या हम खुद अपने बच्चों को बिजनेस से दूर कर रहे हैं? आखिर बनिया अपने बच्चे को धंधे से कैसे जोड़कर रखे?
आज हमारे बनिया-वैश्य समाज के हर घर की कहानी करीब-करीब एक जैसी हो गई है। घर पर पुश्तैनी लाखों का कारोबार है, नौकर-चाकर हैं, पर घर का चिराग, घर से हजारों मील दूर किसी शहर में फाइल लेकर बॉस के आगे-पीछे चक्कर काट रहा है। वह अपना जमा-जमाया बिजनेस छोड़, कुछ हजार की नौकरी के पीछे भाग रहा है। कंपनी के दिए टार्गेट पूरे करने के लिए कंप्यूटर की स्क्रीन पर दिन-रात आंखें गड़ाए बैठा है और किराए के एक छोटे से मकान में जिंदगी बसर कर रहा है। अगर अपना मकान-गाड़ी ले भी ली, तो EMI के चक्कर में रिटायर होने तक गुलामी करने को मजबूर है।