बेटी को सेठ नहीं, साहब चाहिए- क्या शादियों के चक्कर में बनिया का बेटा नौकर बनने को मजबूर है?
आज हम एक ऐसी कड़वी सच्चाई पर बात करने जा रहे हैं, जिसे हम सब महसूस तो कर रहे हैं, पर खुल कर बोल नहीं पा रहे। आज हमारे बनिया-वैश्य समाज के सामने एक अजीब सा संकट खड़ा हो गया है। संकट धंधे का नहीं, संकट मंदी का भी नहीं, बल्कि संकट है हमारे वंश और हमारी विरासत को बचाने का। आज के दौर में एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है- 'बेटी को सेठ नहीं, साहब चाहिए'। जी हां, यही वह हकीकत है जिसने हमारे समाज के मजबूत व्यापारिक